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व्रज – आश्विन कृष्ण तृतीया

Sep 13, 2022
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व्रज – आश्विन कृष्ण तृतीया

Tuesday, 13 September 2022

गुलाबी मलमल के धोती-पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग और गोल चंद्रिका के श्रृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा एवं प्रभु के तत्सुख की भावना से मुखियाजी के स्व-विवेक के आधार पर धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को गुलाबी मलमल के धोती-पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग और गोल चंद्रिका का शृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन -

कीर्तन – (राग : सारंग)

ढाडोई यमुनाघाट देखोई ।

कहा भयो घर गोरस बाढयो और गोधन के घाट ।।१।।

जातपांत कुलको न बड़ो रे चले जाहु किन वाट ।

परमानंद प्रभु रूप ठगोरी लागत न पलक कपाट ।।२।।

साज – आज श्रीजी में गुलाबी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज गुलाबी मलमल की धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के होते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका,लूम एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.

श्वेत एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, वेणु वेत्र श्याम मीना के धराये जाते हैं.


पट गुलाबी एवं गोटी चाँदीकी आती हैं.

 
 
 

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