व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (प्रथम)
- Reshma Chinai

- Mar 13
- 1 min read
व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (प्रथम)
Friday, 13 March 2026
लाल खिनख़ाब के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर गोल पर दोहरा क़तरा के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll
मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान
जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन
अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll
वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल
कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में लाल ज़री की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को लाल खिनख़ाब का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. हरे रंग के ठाडे वस्त्र धराये जाते हैं.
श्रृंगार – आज प्रभु को हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर लाल रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, दोहरा क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, हरे के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट लाल एवं गोटी चाँदी की आती है.

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं. शयन दर्शन में श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराया जाता है.




Comments