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व्रज – आश्विन अधिक शुक्ल षष्ठी

व्रज – आश्विन अधिक शुक्ल षष्ठी

Tuesday, 22 September 2020


आज के मनोरथ-


राजभोग में मख़मल का बगला


शाम को ‘फ़ूलत तन शोभित शृंगार’

(फूल के आभरण) का मनोरथ


विशेष-अधिक मास में आज श्रीजी को सुथन, फेंटा और पटका का श्रृंगार धराया जायेगा.


श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो.

इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था.


ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में छह बार धराया जाता है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन यह श्रृंगार नियम से धराया जाता है. अधिक मास में ये शृंगार उपरोक्त के अलावा धराया जायेगा.


ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : सारंग)


ढाडोई यमुनाघाट देखोई ।

कहा भयो घर गोरस बाढयो और गोधन के घाट ।।१।।

जातपांत कुलको न बड़ो रे चले जाहु किन वाट ।

परमानंद प्रभु रूप ठगोरी लागत न पलक कपाट ।।२।।


साज - श्रीजी में आज केसरी रंग की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.


वस्त्र - श्रीजी को आज चोफुली चुंदड़ी के किनारी के धोरा का सूथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के होते हैं.


श्रृंगार - ठाकुरजी को आज छेड़ान का (हलका) श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण के धराये जाते हैं.


श्रीमस्तक पर चोफुली चुंदड़ी के फेंटा का साज धराया जाता है जिसमें चोफुली चुंदड़ी के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में हीरा के लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.

कमल माला धरायी जाती है. श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी और दो वेत्रजी धराये जाते हैं.

पट लाल रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.


उत्थापन पीछे आभरण बड़े करके फूलन के आभरण धराये जाते हैं और प्रभु को विशेष भोग सामग्री आरोगाए जाते हैं.


 
 
 

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