व्रज – भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी
- Reshma Chinai

- Aug 17, 2020
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व्रज – भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी
Monday, 17 August 2020
विशेष – आज श्रीजी को केसरी धोती-पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग धराये जाते हैं.
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : आशावरी)
तेरे लाल मेरो माखन खायो l
भर दुपहरी देखि घर सूनो ढोरि ढंढोरि अबहि घरु आयो ll 1 ll
खोल किंवार पैठी मंदिरमे सब दधि अपने सखनि खवायो l
छीके हौ ते चढ़ी ऊखल पर अनभावत धरनी ढरकायो ll 2 ll
नित्यप्रति हानि कहां लो सहिये ऐ ढोटा जु भले ढंग लायो l
‘नंददास’ प्रभु तुम बरजो हो पूत अनोखो तैं हि जायो ll 3 ll
साज – आज श्रीजी में केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी मलमल की धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.
श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना एवं स्वर्ण के सर्व-आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर लूम गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
आज चार मालाजी धरावे.
श्वेत एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट केसरी एवं गोटी चाँदी की आती हैं.





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