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व्रज – भाद्रपद शुक्ल तृतीया

व्रज – भाद्रपद शुक्ल तृतीया

Friday, 21 August 2020


विशेष – आज का श्रृंगार ऐच्छिक है, ऐच्छिक श्रृंगार नियम के श्रृंगार के अलावा अन्य खाली दिनों में ऐच्छिक श्रृंगार धराया जाता है. ऐच्छिक श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, मौसम की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत की आज्ञा एवं मुखिया जी के स्व-विवेक के आधार पर धराया जाता है.


आज श्रीजी को लाल सफ़ेद लहरिया का पिछोड़ा एवं गोल पाग का श्रृंगार धराया जाएगा यध्यपि चित्र में रंग एवं श्रीमस्तक का शृंगार थोड़ा भिन्न हैं.


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : सारंग)


महारास पूरन प्रगट्यो आनि l

अति फूली घरघर व्रजनारी श्री राधा प्रगटी जानि ll 1 ll

धाई मंगल साज सबे लै महा ओच्छव मानि l

आई घर वृषभान गोप के श्रीफल सोहत पानि ll 2 ll

कीरति वदन सुधानिधि देख्यौ सुन्दर रूप बखानि l

नाचत गावत दै कर तारी होत न हरख अघानि ll 3 ll

देत असिस शीश चरनन धर सदा रहौ सुखदानि l

रसकी निधि व्रजरसिक राय सों करो सकल दुःख हानि ll 4 ll


साज – श्रीजी में आज लाल एवं सफ़ेद लहरियाँ की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.


वस्त्र – श्रीजी को आज लाल व सफ़ेद रंग की मलमल का लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पिले रंग के (चित्र में भिन्न) होते हैं.


श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान (घुटने तक) का श्रृंगार धराया जाता है. सवर्ण के सर्वआभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर लाल सफ़ेद लहरिया की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में सोना के कर्णफूल धराये जाते हैं.

श्रीकंठ चार मालाजी पीले एवं श्वेत पुष्पों की रंगीन थागवाली धरायी जाती हैं.

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श्रीहस्त में कमलछड़ी, सवर्ण के वेणुजी एवं दो वेत्रजीधराये जाते हैं.

पट लाल व गोटी सोना की आती हैं.

 
 
 

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