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व्रज – पौष शुक्ल द्वितीया

व्रज – पौष शुक्ल द्वितीया

Monday, 22 December 2025


लाल साटन के घेरदार वागा, केसरी पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : तोडी)


हों बलि बलि जाऊं तिहारी हौ ललना आज कैसे हो पाँव धारे l

कौन मिस आवन बन्यो पिय जागे भाग्य हमारे ll 1 ll

अब हों कहा न्योछावर करूँ पिय मेरे सुंदर नंददुलारे l

'नंददास' प्रभु तन-मन-धन प्राण यह लेई तुम पर वारे ll 2 ll


साज – श्रीजी में आज लाल रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया वाली शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.


वस्त्र – श्रीजी को आज लाल साटन पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. पटका केसरी मलमल का धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर गोल पाग के ऊपर सिरपैंच और गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में कर्णफूल की एक जोड़ी धरायी जाती हैं. श्रीकंठ में पिले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.


पट लाल व गोटी मीना की आती है.

 
 
 

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