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व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्दशी
व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्दशी Wednesday, 01 April 2026 चौफ़ुली चुंदड़ी के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चन्द्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – आज श्रीजी में बाल भ

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Apr 11 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी
व्रज - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी Tuesday, 31 March 2026 गुलाबी मलमल के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग़्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन (राग : घनाश्री) यशोदा रानी जायो है सुत नीको l आनंद भयो सकल गोकुलमें गोप वधु लाई टीको ll 1 ll अक्षत दूब रोचन वंदन नंदे तिलक दहीं को l अंचल वारि वारि मुख निरखत कमल नैन प्यारो जीकों ll 2 ll अपने अपने भवन से निकसी पहेरे चीर कसुम्भी को l 'यादवेन्द्र' व्रजकुल प्रति पालक कंस काल भय भीको ll 3 ll साज – श्रीजी में आज गुलाबी रंग की रुप

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Mar 311 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल द्वादशी
व्रज - चैत्र शुक्ल द्वादशी Monday, 30 March 2026 मल्लकाछ टीपारा पे खुलेबंध एवं माखन चोरी की पिछवाई का विशिष्ट श्रृंगार मल्लकाछ शब्द दो शब्दों (मल्ल एवं कच्छ) के मेल से बना है. ये एक विशेष परिधान है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं. यह श्रृंगार पराक्रमी प्रभु को वीर-रस की भावना से धराया जाता है. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) तेरे लाल मेरो माखन खायो l भर दुपहरी देखि घर सूनो ढोरि ढंढोरि अबहि घरु आयो ll 1 ll खोल किंवार पैठी मंदिरमे सब दधि अपने सखनि ख

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Mar 302 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल एकादशी
व्रज - चैत्र शुक्ल एकादशी Sunday, 29 March 2026 कामदा एकादशी, श्री महाप्रभुजी के उत्सव की बधाई बैठे, बालभाव के श्रृंगार आरंभ विशेष - आज कामदा एकादशी है. आज से श्रीजी में श्री महाप्रभुजी के उत्सव की बधाई पंद्रह दिवस की बैठती है. अगले पंद्रह दिवस श्री महाप्रभुजी की एवं जन्माष्टमी की बधाईयाँ गायी जातीं हैं. आज से प्रभु को बालभाव के श्रृंगार धराये जाते हैं. जैसे श्रृंगार हो उस भाव के बधाई के कीर्तन गाये जाते हैं. आज से आगामी पंद्रह दिन तक अमंगल रंगों के वस्त्र नहीं धराये जाते हैं

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Mar 292 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल दशमी
व्रज - चैत्र शुक्ल दशमी Saturday, 28 March 2026 रामनवमी का परचारगी श्रृंगार सेवाक्रम -गेंद, चौगान व दिवला सभी सोने के आते हैं. दो समय की आरती थाल में की जाती है. राजभोग में पीठक पर पुष्पों का चौखटा आता हैं. विशेष – आज श्रीजी में सम्पूर्ण रामलीला के चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. यही पिछवाई श्रीजी में विजयादशमी के एक दिन पूर्व महा-नवमी के दिन भी धरायी जाती है. आज पिछवाई के अलावा सभी वस्त्र एवं श्रृंगार पिछली कल की भांति ही होते हैं. इसे परचारगी श्रृंगार कहते हैं. श्रीजी मे

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Mar 282 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल नवमी
व्रज - चैत्र शुक्ल नवमी Friday, 27 March 2026 नौमी चैत की उजियारी । दसरथ के गृह जनम लियौ है मुदित अयोध्या नारी ll 1 ll राम लच्छमन भरत सत्रुहन भूतल प्रगटे चारी l ललित विलास कमल दल लोचन मोचन दुःख सुख कारी ll 2 ll मन्मथ मथन अमित छबि जलरुह नील बसन तन सारी l पीत बसन दामिनी द्युति बिलसत दसन लसत सित भारी ll 3 ll कठुला कंठ रत्न मनि बघना धनु भृकुटी गति न्यारी l घुटुरुन चलत हरत मन सबको ‘तुलसीदास’ बलिहारी ll 4 ll रामनवमी आज श्रीजी में जन्माष्टमी के दिन धरायी जाने वाली लाल पिछवाई साजी जा

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Mar 272 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल अष्टमी
व्रज - चैत्र शुक्ल अष्टमी Thursday, 26 March 2026 रामनवमी के आगम का श्रृंगार, विशेष – कल रामनवमी है और आज श्रीजी को उत्सव के एक दिन पूर्व धराया जाने वाला आगम का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. अधिकतर बड़े उत्सवों के एक दिन पूर्व लाल वस्त्र एवं पाग-चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है. यह श्रृंगार अनुराग के भाव से धराया जाता है. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) आज की बानिक कही न जाय, बैठे निकस कुंजद्वार l लटपटी पाग सिर सिथिल चिहुर चारू खसित बरुहा चंदरस भरें ब्रजराजकुमार ll 1

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Mar 262 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल सप्तमी
व्रज - चैत्र शुक्ल सप्तमी Wednesday, 25 March 2026 स्याम चुंदड़ी का सूथन चोली तथा खुलेबंद के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव (नागफनी) का क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) नयनन लागी हो चटपटी l मदनमोहन पिय नीकसे द्वार व्है, शोभित पाग लटपटी ll 1 ll दूर जाय फीर चितयेरी मो तन, नयन कमल मनोहर भृकुटी l 'गोविंद' प्रभु पिय चलत ललित गति, कछुक सखा अपनी गटी ll 2 ll साज – आज श्रीजी में स्याम चुंदड़ी की सुनहरी तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित प

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Mar 251 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल षष्ठी
व्रज - चैत्र शुक्ल षष्ठी Tuesday, 24 March 2026 यदुनाथजी का उत्सव चतुर्थ (काजली, श्याम अथवा केसरी) गणगौर, आज काजली (श्याम) गणगौर है और श्री यमुनाजी के भाव की है अतः इसे घर की गणगौर भी कहा जाता है. पारंपरिक रूप से इस दिन महिलाएं श्याम चौफूली चूंदड़ी के वस्त्र धारण करती आयी हैं. परन्तु वर्ष 1950 में जब वर्तमान तिलकायत श्री राकेशजी महाराज का जन्म हुआ तो उनके जन्म के लगभग एक माह उपरान्त ही गणगौर का त्यौहार था. तब उनकी मातृचरण अ. सौं. नित्यलीलास्थ विजयलक्ष्मी बहूजी के कथनानुसार श्

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Mar 242 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल पंचमी
व्रज - चैत्र शुक्ल पंचमी Monday, 23 March 2026 रंगीली गुलाबी गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये। विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥ लै कर बीन बजाय गाय पिय प्यारी जेंमत रुचि उपजैये। कृष्णदास वृषभानु सुता संग घूमर दै दै नंदनंद रिझैये॥ तृतीय (गुलाबी) गणगौर विशेष – आज गुलाबी गणगौर है और ललिताजी के भाव की है अतः आज सर्व साज एवं वस्त्र गुलाबी घटावत धराये जाते हैं आज के वस्त्र शीतकाल की गुलाबी घटा जैसे ही होते हैं परन्तु उन दिनों शीतकाल होने से वस्त्र साटन (Satin

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Mar 232 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया
व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया Sunday, 22 March 2026 रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये। विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥१॥ लै कर बीन बजाय गाय पिय प्यारी जेंमत रुचि उपजैये। कृष्णदास वृषभानु सुता संग घूमर दै दै नंदनंद रिझैये॥२॥ द्वितीय (हरी) गणगौर विशेष – आज हरी गणगौर है. आज की गणगौर चन्द्रावलीजी के भाव की है अतः श्रीजी को नियम के पंचरंगी लहरिया वस्त्र धराये जाते हैं. पहली तीनों गणगौरों (चूंदड़ी, हरी व गुलाबी) में रात्रि के अनोसर में श्रीजी को सूखे म

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Mar 222 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया
व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया Saturday, 21 March 2026 छबीली राधे,पूज लेनी गणगौर । ललिता विशाखा,सब मिल निकसी, आइ वृषभान की पोर, सधन कुंज गहवर वन नीको, मिल्यो नंदकिशोर ।। " नंददास " प्रभु आये अचानक, घेर लिये चहुं ओर ।। प्रथम (चुंदड़ी) गणगौर राजस्थान का रंग-बिरंगा पर्व गणगौर आज से आरम्भ हो रहा है. सामान्यतया राजस्थान में चार (चूंदड़ी, हरी, गुलाबी एवं काजली) गणगौर होती है. विश्व के सभी हिस्सों में बसे राजस्थानी विवाहित स्त्रियाँ गणगौर का पूजन करती हैं. नाथद्वारा में भी पूज्य श्रीतिल

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Mar 213 min read


व्रज - चैत्र शुक्ल द्वितीया
व्रज - चैत्र शुक्ल द्वितीया Friday, 20 March 2026 स्याम छापा के खुलेबंध के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) नयनन लागी हो चटपटी l मदनमोहन पिय नीकसे द्वार व्है, शोभित पाग लटपटी ll 1 ll दूर जाय फीर चितयेरी मो तन, नयन कमल मनोहर भृकुटी l 'गोविंद' प्रभु पिय चलत ललित गति, कछुक सखा अपनी गटी ll 2 ll साज – आज श्रीजी में स्याम रंग के छापा की सुनहरी तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गा

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Mar 201 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण अमावस्या २०८३
व्रज - चैत्र कृष्ण अमावस्या २०८३ Thursday, 19 March 2026 भारतीय नव-संवत्सर २०८३ चैत्र मास संवत्सर परवा, वरस प्रवेश भयो है आज l कुंज महल बैठे पिय प्यारी, लालन पहेरे नौतन साज ll 1 ll आपुही कुसुम हार गुही लीने, क्रीड़ा करत लाल मन भावत l बीरी देत दास ‘परमानंद’, हरखि निरखि जश गावत ll 2 ll आप सभी वैष्णवों को नव-संवत्सर २०८२ की ख़ूबख़ूब बधाई श्रृंगार समय प्रभु के मुख्य पंड्याजी श्रीजी के सम्मुख नववर्ष का पंचांग वाचन करते हैं एवं न्यौछावर की जाती है. आज से आरती में एक खंड कम रखा जाता

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Mar 192 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्दशी
व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्दशी Wednesday, 18 March 2026 श्याम ज़री के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग :सारंग) मेरी अखियन के भूषण गिरिधारी । बलि बलि जाऊ छबीली छबि पर अति आनंद सुखकारी ।।१।। परम उदार चतुर चिंतामनिवदरस दरस दुं दु़:खहारी । अतुल प्रताप तनक तुलसी दल मानत सेवा भारी ।।२।। छीतस्वामी गिरिधरन विसद यश गावत गोकुलनारी । कहा वरनौ गुन गाथ नाथके श्रीविट्ठल ह्रदय विहारी ।।३।। साज – श्रीजी में आज श्याम ज़री की पिछवाई

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Mar 181 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण त्रयोदशी
व्रज - चैत्र कृष्ण त्रयोदशी Tuesday, 17 March 2026 मुकुट काछनी का श्रृंगार प्रभु को मुख्य रूप से तीन लीलाओं (शरद-रास, दान और गौ-चारण) के भाव से मुकुट का श्रृंगार धराया जाता है. जब भी मुकुट धराया जाता है वस्त्र में काछनी धरायी जाती है. काछनी के घेर में भक्तों को एकत्र करने का भाव है. जब मुकुट धराया जाये तब ठाड़े वस्त्र सदैव श्वेत रंग के होते हैं. ये श्वेत वस्त्र चांदनी छटा के भाव से धराये जाते हैं. जिस दिन मुकुट धराया जाये उस दिन विशेष रूप से भोग-आरती में सूखे मेवे के टुकड़ों से

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Mar 172 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण द्वादशी
व्रज - चैत्र कृष्ण द्वादशी Monday, 16 March 2026 सफेद फुलक शाही ज़री के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर छज्जेदार चीरा (पाग) पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – आज श्रीजी म

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Mar 161 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण एकादशी
व्रज - चैत्र कृष्ण एकादशी (पापमोचनी एकादशी) Wednesday, 26 March 2025 सेहरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) दिन दुल्है मेरो कुंवर कन्हैया l नित उठ सखा सिंगार बनावत नितही आरती उतरत मैया ll 1 ll नित प्रति मौतिन चौक पुरावत नित प्रति विप्रन वेद पढ़ैया l नित ही राई लोन उतारत नित ही 'गदाधर' लेत बलैया ll 2 ll साज – आज श्रीजी में विवाह खेल लीला की, विवाह मंडप के चित्रांकन वाली सुन्दर पिछवाई धरायी जाती है. श्रीजी लग्न-मंडप में विराजित हैं, श्री स्वामिनी जी एवं श्री

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Mar 152 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (द्वितीय)
व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (द्वितीय) Saturday, 14 March 2026 पीली सलीदार जरी के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे ह

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Mar 141 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (प्रथम)
व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी (प्रथम) Friday, 13 March 2026 लाल खिनख़ाब के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर गोल पर दोहरा क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – आज श्रीजी में लाल ज़री की पिछव

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Mar 131 min read
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