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व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी

व्रज - चैत्र कृष्ण दशमी

Tuesday, 06 April 2021


विशेष – आज के दिन ही नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री राजीव जी (दाऊ बावा) महाराज श्री नित्यलीला में पधारे थे.


श्रीजी में आज का श्रृंगार ऐच्छिक है. नियम के श्रृंगार के अलावा अन्य खाली दिनों में ऐच्छिक श्रृंगार धराया जाता है.

ऐच्छिक श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत की आज्ञा एवं मुखिया जी के स्व-विवेक के आधार पर धराया जाता है.


श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत की आज्ञा एवं मुखिया जी के स्व-विवेक के आधार पर धराया जाता है.


मेरी जानकारी के अनुसार आज श्रीजी को पिले रंग की ज़री पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं घेरदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा.


राजभोग दर्शन -


कीर्तन (राग : सारंग,कल्याण)


नवल घनश्याम नव नवल वर

राधाके नवल नवकुंज में केली ठानि ।

नवल कुसुमावलि नवल शय्या रचि

नवल कोकिल किर भृंग गानी ।।१।।

नवल सहचरी वृंद नवल वीना मृदंग

नवल रागनी राग तान गानि ।

नवल गोपीनाथ होत नवल रस रीत

येहे नवल रस रीत हरिवंश जानि ।।२।।


साज – आज श्रीजी में पिली ज़री की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.


वस्त्र – आज श्रीजी को पिली ज़री का, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली तथा घेरदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर पिले रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, क़तरा, चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी माणक के कर्णफूल धराये जाते हैं.

गुलाबी पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, हरे मीना के वेणुजी दो वेत्रजी धराये जाते हैं.

पट पिला एवं गोटी मीना की आती है.


संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं. शयन दर्शन में श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराया जाता है.


 
 
 

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