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व्रज – पौष शुक्ल नवमी

व्रज – पौष शुक्ल नवमी

Monday, 29 December 2025


बैंगनी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : तोडी)


हों बलि बलि जाऊं तिहारी हौ ललना आज कैसे हो पाँव धारे l

कौन मिस आवन बन्यो पिय जागे भाग्य हमारे ll 1 ll

अब हों कहा न्योछावर करूँ पिय मेरे सुंदर नंददुलारे l

'नंददास' प्रभु तन-मन-धन प्राण यह लेई तुम पर वारे ll 2 ll


साज – आज श्रीजी में बैंगनी रंग की हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.


वस्त्र – आज श्रीजी को बैंगनी रंग के साटन (Satin) के रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं. लाल रंग के मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र अमरसी रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण हीरा के धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, सीधी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.

पीले रंग के पुष्पों की कमलाकार कलात्मक मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में चाँदी के वेणुजी एवं वैत्रजी धराये जाते हैं.


पट बैंगनी गोटी चाँदी की आती हैं.

 
 
 

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