top of page
Search

व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी

व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी

Saturday, 17 January 2026


पतंगी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग :सारंग)


मेरी अखियन के भूषण गिरिधारी ।

बलि बलि जाऊ छबीली छबि पर अति आनंद सुखकारी ।।१।।

परम उदार चतुर चिंतामनिवदरस दरस दुं

दु़:खहारी ।

अतुल प्रताप तनक तुलसी दल मानत सेवा भारी ।।२।।

छीतस्वामी गिरिधरन विसद यश गावत गोकुलनारी ।

कहा वरनौ गुन गाथ नाथके श्रीविट्ठल ह्रदय विहारी ।।३।।


साज – श्रीजी में आज पतंगी मखमल पर काँच के टुकड़ा की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.


वस्त्र – श्रीजी को आज पतंगी साटन पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. पटका मलमल का धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान के (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर पतंगी ज़री की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में कर्णफूल के एक जोड़ी धराये जाते हैं.

सफेद एव पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.


पट पतंगी व गोटी चाँदी की आती है.

 
 
 

Comments


© 2020 by Pushti Saaj Shringar.

bottom of page