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व्रज – माघ कृष्ण दशमी

Jan 24, 2025
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व्रज – माघ कृष्ण दशमी

Friday, 24 January 2025


फ़िरोज़ी साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : आसावरी)


आज शृंगार निरख श्यामा को नीको बन्यो श्याम मन भावत ।

यह छबि तनहि लखायो चाहत कर गहि के मुखचंद्र दिखावत ।।१।।

मुख जोरें प्रतिबिम्ब विराजत निरख निरख मन में मुस्कावत ।

चतुर्भुज प्रभु गिरिधर श्री राधा अरस परस दोऊ रीझि रिझावत ।।२।।


साज – श्रीजी को आज फ़िरोज़ी साटन पर सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया वाली शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.


वस्त्र – श्रीजी को आज फ़िरोज़ी साटन पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं. पटका मलमल का धराया जाता हैं.ठाड़े वस्त्र स्याम रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर फ़िरोज़ी पगा पर सिरपैंच, पगा चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.

श्रीकर्ण में लोलकबिंदी धराये जाते हैं.

श्वेत एवं पीले पुष्पों की गुलाबी थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में लाल मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.

पट फ़िरोज़ी व गोटी बाघ बकरी की आती है.



संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर छेड़ान के (छोटे) श्रृंगार धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराये जाते हैं.

 
 
 

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