top of page
Search

व्रज -श्रावण शुक्ल सप्तमी

Jul 25, 2023
2 min read

व्रज -श्रावण शुक्ल सप्तमी

Tuesday, 25 July 2023

मेघश्याम धोरा के सुथन, फेटा और पटका के शृंगार

आज के मनोरथ-

राजभोग में गंगा जमुनी बंगला

शाम को गायन सो ब्रज छायो

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो.

इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।

देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत

किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।

सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।

हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,

महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज मेघश्याम रंग की मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज मेघश्याम रंग के धोरा का सुथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के होते हैं.

शृंगार - ठाकुरजी को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण गुलाबी मीना के छेड़ान के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर मेघश्याम फेटा का साज धराया जाता है जिसमें मेघश्याम रंग के फेटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.

श्रीकर्ण में लोलकबंदी (लड़ वाले कर्णफूल) धराये जाते हैं.

श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी धराये जाते हैं.


पट मेघस्याम रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

 
 
 

Comments


© 2020 by Pushti Saaj Shringar.

bottom of page