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व्रज - चैत्र कृष्ण नवमी
व्रज - चैत्र कृष्ण नवमी Thursday, 12 March 2026 हरे ख़िनख़ाब के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।। साज –

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Mar 121 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण अष्टमी
व्रज - चैत्र कृष्ण अष्टमी Wednesday, 11 March 2026 केसरी ज़री की गोल काछनी, श्रीमस्तक पर टिपारा का साज के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) कहा कहों लाल सुधर रंग राख्यो मुरलीमें l तानबंधान स्वरभेद लेत अतिजत बिचबिच मिलवत विकट अवधर ll 1 ll चोख माखन की रेख तामें गायन मिलवत लांबे लांबे स्वर l बिच बिच लेत तिहारो नाम सुनरी सयानी 'गोविंदप्रभु' व्रजरानी के कुंवर ll 2 ll वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी ज़री का सूथन, दोनों काछनी एवं मेघश्याम दरियाई वस्त्र की चोली धराये जाते है

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Mar 111 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण सप्तमी
व्रज - चैत्र कृष्ण सप्तमी Tuesday, 10 March 2026 समस्त वैष्णव सृष्टि को प्रधान गृह युवराज श्री विशाल बावाश्री के गो. चि. श्री लाल गोविन्दजी (लालबावा साहब) के जन्मदिन की ख़ूबख़ूब बधाई श्री वल्लभ कल्पद्रुम फल्यो, फल लाग्यो विट्ठलेश । शाखा सब बालक भये, ताको पार ना पावत शेष ।। श्री वल्लभ को कल्पद्रुम, छाय रह्यो जग मांहि। पुरुषोत्तम फल देत हैं, नेक जो बैठों छांह ॥ गो. चि. श्री लाल गोविन्दजी (लालबावा साहब) का जन्मदिन सेवाक्रम - श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को

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Mar 103 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण षष्ठी
व्रज - चैत्र कृष्ण षष्ठी Monday, 09 March 2026 बैंगनी ज़री के चाकदार वागा, श्रीमस्तक पर ग़्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – श्रीजी में आज बैंगनी ज़री की ह

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Mar 91 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण पंचमी
व्रज - चैत्र कृष्ण पंचमी Sunday, 08 March 2026 रंग पंचमी विशेष – आज की पंचमी को रंग-पंचमी कहा जाता है. उत्तर भारत में विशेषकर मध्य-प्रदेश, राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज के दिन सूखे और गीले रंगों से होली खेली जाती है. पुष्टिसंप्रदाय के अलावा अन्य मर्यादामार्गीय मंदिरों में आज रंगपंचमी को प्रभु स्वरूपों को होली खेलायी जाती है और आगामी चैत्र कृष्ण एकादशी को डोल झुलाये जाते है. श्री गुसांईजी के चतुर्थ पुत्र श्री गोकुलनाथजी माला-तिलक रक्षण हेतु कश्मीर पधारे थे. श्री गोवर्धनधरण

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Mar 83 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्थी
व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्थी Saturday, 07 March 2026 मेघश्याम ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल बाक़ी चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – आज श्रीजी में फ़

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Mar 71 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण तृतीया
व्रज - चैत्र कृष्ण तृतीया Friday, 06 March 2026 फ़िरोज़ी ख़िनख़ाब के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।।

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Mar 61 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण द्वितीया
व्रज - चैत्र कृष्ण द्वितीया Thursday, 05 March 2026 हरी ज़री के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll साज – आज श्रीजी में हरी ज़री की पिछवाई

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Mar 51 min read


व्रज - चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
व्रज - चैत्र कृष्ण प्रतिपदा Wednesday, 04 March 2026 लाल नेक भवन हमारे आवो । जो मांगो सो देहो मोहन ले मुरली कल गावो ।।१।। मंगलचार करो गृह मेरे संगके सखा बुलावो । करो विनोद सुंदर युवतीनसों प्रेम पीयूष पीवावो ।।२।। बलबल जाऊं मुखारविंदकी ललित त्रिभंग दीखावो । परमानंद सहचरी रसभर ले चली करत उपावो ।।३।। द्वितीया पाट आज प्रभु को नियम के सुनहरी ज़री के चाकदार वस्त्र और श्रीमस्तक पर हीरा की कुल्हे पर सुनहरी घेरा धराये जाते हैं. उत्सव के कारण गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में चाशनी लगे पक्के ग

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Mar 42 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा
व्रज - फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा Tuesday, 03 March 2026 मनमोहन अद्भुत डोल बनी । तुम झुलो हों हरख झुलाऊं वृन्दावन चंद धनी ।।१।। परम विचित्र रच्यो विश्वकर्मा हीरा लाल मनी । चतुर्भुज प्रभु गिरिधरन लाल छबि कापे जात गनी ।।२।। होली का उत्सव / होलिका प्रदीपन / दोलोत्सव ( डोल का उत्सव) सामान्यतया होलिकोत्सव तिथी प्रधान होने से फ़ाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन और डोलोत्सव नक्षत्र प्रधान होने के कारण जिस दिन सूर्योदय के समय उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होवे उस दिन मनाया जाता है. इस वर्ष आज के दिन

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Mar 35 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी Monday, 02 March 2026 होली का उत्सव आज प्रभु को नियम से पाग-चन्द्रिका, सूथन व घेरदार वागा धराये जाते हैं फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से श्रीजी में डोलोत्सव की सामग्रियां सिद्ध होना प्रारंभ हो जाती है. इनमें से कुछ सामग्रियां फाल्गुन शुक्ल नवमी से प्रतिदिन गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में श्रीजी को अरोगायी जाती हैं और डोलोत्सव के दिन भी प्रभु को अरोगायी जायेंगी. इस श्रृंखला में आज श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में मीठे कटपूवा अरोगाये जाते हैं. इसके अतिरिक्त

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Mar 23 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी Sunday, 01 March 2026 आपश्री के चौदस के श्रृंगार जन्माष्टमी, दीपावली और डोलोत्सव आदि बड़े उत्सवों के पूर्व श्रीजी को नियम के श्रृंगार धराये जाते हैं जिन्हें आपश्री के या घर के श्रृंगार भी कहा जाता है और इन पर श्रीजी के तिलकायत महाराज का विशेष अधिकार होता है. डोलोत्सव पर सामान्यतया फाल्गुन शुक्ल नवमी से द्वितीया पाट के दिन तक प्रभु को ये विशिष्ट श्रृंगार धराये जाते हैं परंतु तिथियों में परिवर्तन के कारण इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन का श्रृ

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Mar 13 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल द्वादशी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल द्वादशी Saturday, 28 February 2026 खेलतु फाग लख्यौ पिय प्यारी कों, ता सुख की उपमा किहीं दीजै। देखत ही बनि आवै भलै 'रसखान' , कहा है जो वारि न कीजै।। ज्यौं ज्यौं छबीली कहै पिचकारी लै , एक लई यह दूसरी लीजे। त्यौं त्यौं छबीलो छकै छाक सौं , हेरै हंसे न टरै खरौ भीजे। आप (तिलकायत श्री) के श्रृंगार (त्रयोदशी का श्रृंगार) नवमी से द्वितीया पाट के दिन तक प्रभु को विशिष्ट श्रृंगार धराये जाने प्रारंभ हो जाते हैं. इन्हें ‘आपके श्रृंगार’ अथवा ‘तिलकायत श्री के श्रृंगार

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Feb 283 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल एकादशी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल एकादशी Friday, 27 February 2026 फागुन लाग्यौ सखि जब तें, तब तें ब्रजमण्डल में धूम मच्यौ है। नारि नवेली बचै नाहिं एक, बिसेख मरै सब प्रेम अच्यौ है।। सांझ सकारे वही 'रसखानि' सुरंग गुलालन खेल मच्यौ है। को सजनी निलजी न भई अरु , कौन भटु जिहिं मान बच्यौ है।। कुंज एकादशी श्रृंगार दर्शन में कुंज के भाव की पिछवाई आती है जिसे ग्वाल समय बड़ा कर दिया जाता है. आज नियम का मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है. वर्ष में केवल आज श्रीजी को एक दिन में तीन विविध प्रकार के म

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Feb 272 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल दशमी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल दशमी Thursday, 26 February 2026 आवत लाल गुपाल लिये सूने, मग मिली इक नार नवीनी। त्यौं 'रसखानि' लगाई हिय भट् , मौज कियौ मनमांहि अधीनी।। सारी फटी सुकुमारी हटी अंगिया , दरकी सरकी रंगभीनी। गाल गुलाल लगाइ कै अंक , रिझाई बिदा कर दीनी।। आप (तिलकायत श्री) के द्वादशी के श्रृंगार फाल्गुन शुक्ल नवमी से प्रभु को विशिष्ट श्रृंगार धराये जाने प्रारंभ हो गये हैं. इन्हें ‘आपके श्रृंगार’ अथवा ‘तिलकायत श्री के श्रृंगार’ कहा जाता है. ये शृंगार द्वितीया पाट तक धराये जायेंगे.

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Feb 263 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल नवमी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल नवमी Wednesday, 25 February 2026 सुन्दर स्याम सुजान सिरोमनि देहु कहा कहि गारी जू।।बड़े लोग के औगुन ब्ररनत सकुच होत जिय भारी।।1।। को करि सके पिता को निर्णय जाति पांति को जानें।। जिनके जिय जेसी बनि आवे तेसी भांति बखानें।।2।। माया कुटिल नटी तन चितयो कोन बड़ाई पाई।।उन चंचल सब जगत विगोयो जहाँ तहाँ भई हँसाई।।3।। तुम पुनि प्रगट होई बारेते कोन भलाई कीनी।।मुक्ति वधू उत्तम जन लायक ले अधमन कों दीनी।।4।। बसि दस मास गर्भ माता के उन आशा करी जाये।।सो घर छांडि जीभ के लालच

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Feb 254 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी Tuesday, 24 February 2026 होलकाष्टकारंभ विशेष –आज से होलकाष्टक प्रारंभ हो जाता है. होली के आठ दिन पूर्व शुरू होने वाले होलकाष्टक के दिनों में कोई लौकिक शुभ कार्य नहीं किये जाते. व्रज में इस अष्टमी, नवमी व दशमी से होली तक नंदगांव व बरसाना में विश्वप्रसिद्द लट्ठमार होली खेली जाती है. इसे होरंगा भी कहा जाता है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक व्रज में जाते हैं. आज श्री नवनीतप्रियाजी में बगीचा उत्सव है. आज के दिन प्रभु श्री नवनीतप्रियाजी मंदिर म

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Feb 242 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल षष्ठी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल षष्ठी Monday, 23 February 2026 प्रभु मथुराधीशजी (कोटा) का पाटोत्सव, पुष्टिमार्गीय प्रधान गृहाधीश परमपूज्य गौस्वामी तिलकायत श्री इन्द्रदमनजी (श्री राकेशजी) महाराजश्री का जन्मदिवस विशेष - आज कोटा में विराजित निधि स्वरुप श्री मथुराधीशजी का पाटोत्सव है. इसके अतिरिक्त आज श्रीजी में पुष्टिमार्गीय प्रधान गृहाधीश परमपूज्य गौस्वामी तिलकायत श्री इन्द्रदमनजी (श्री राकेशजी) का जन्मदिवस है.(विस्तृत विवरण अन्य पोस्ट में) दोनों शुभ प्रसंगों की श्रीमान तिलकायत, चिरंजीवी

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Feb 232 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल पंचमी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल पंचमी Sunday, 22 February 2026 गुलाबी लट्ठा के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर सीधी चन्द्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : वसंत) आई ऋतु चहूँदिस फूले द्रुम कानन कोकिला समूह मिलि गावत वसंतहि। मधुप गुंजारत मिलत सप्तसुर भयो है हुलास तन मन सब जंतहि॥ मुदित रसिक जन उमगि भरे हैं नहिं पावत मन्मथ सुख अंतहि। कुंभनदास स्वामिनी बेगि चलि यह समें मिलि गिरिधर नव कंतहि॥ साज – आज श्रीजी में श्वेत मलमल की सादी पिछवाई धरायी जाती है जिसके ऊपर गुल

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Feb 221 min read


व्रज - फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी
व्रज - फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी Saturday, 21 February 2026 मोहन होहो होहो होरी।। काल्ह हमारे आंगन गारी देआयो सो कोरी।।1।। अब क्योंदूर बैठे जसोदा ढिंग निकसो कुंज बिहारी।। उमगउमग आईं गोकुल की वे सब वाई दिन बारी।।2।। तबही लाल ललकार निकारे रूप सुधाकी प्यासी।। लपट गई घनश्याम लालसों चमक चमक चपलासी।।3।। काजर दे भजिभार भरुवाकें हँसहँस ब्रजकीनारी।। कहें रसखान एक गारीपर सो आदर बलिहार।।4।। केसरी लट्ठा के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर केसरी गोल पाग पर मोर चंद्रिका के शृंगार कीर्तनों में अष्टपदी

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Feb 212 min read
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