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व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी (पूर्णिमा क्षय)
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी (पूर्णिमा क्षय) Thursday, 04 December 2025 पूर्णिमा व्रत आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन न अघाय री । सुंदर बदनकमल की शोभा मो मन रह्यो है लुभाय री ।।१।। के निरखूं के टहेल करूं ऐको नहि बनत ऊपाय री । जैसे लता पवनवश द्रुमसों छूटत फिर लपटाय री ।।२।। मधु मेवा पकवान मिठाई व्यंजन बहुत बनाय री । राग रंग में चतुर सुर प्रभु कैसे सुख उपजाय री ।। नियम (घर) का छप्पन भोग, बलदेवजी (दाऊजी) का उत्सव आज श्रीजी में नियम (घर) का छप्पनभोग है. छप्पनभोग के विषय में कई

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Dec 4, 20256 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी Wednesday, 03 December 2025 श्रीजी में चतुर्थ (अमरसी) घटा विशेष – आज श्रीजी में चतुर्थ (अमरसी) घटा होगी. आज की घटा नियम से मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को होने वाले घर के छप्पनभोग से एक दिन पहले होती है. मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी से मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा तक पूर्णिमा को होने वाले घर (नियम) के छप्पनभोग उत्सव के लिए विशेष सामग्रियां सिद्ध की जाती हैं. ये विशेष रूप से सिद्ध हो रही सामग्रियां प्रतिदिन गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में श्रीजी को अरोगायी जाती

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Dec 3, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी Tuesday, 02 December 2025 शीतकाल की द्वितीय चौकी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी से मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा तक पूर्णिमा को होने वाले घर (नियम) के छप्पनभोग उत्सव के लिए विशेष सामग्रियां सिद्ध की जाती हैं जिन्हें प्रतिदिन गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में श्रीजी को अरोगाया जाता है. इसी श्रृंखला में श्रीजी को आज तवापूड़ी (इलायची, मावे व तुअर की दाल के मीठे मसाले से भरी पूरनपोली जैसी सामग्री जिसमें आंशिक रूप में कस्तूरी भी मिलायी जाती है) का भोग अरोगाया जाता है. य

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Dec 2, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी Monday, 01 December 2025 (मोक्षदा एकादशी व्रत) (गीता जयंती) श्वेत साटन के चागदार वागा लाल रूमाल एवं श्रीमस्तक पर लसनिया का जड़ाऊ कूल्हे पर पगा का पान व टीपारा का साज के शृंगार मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) ब्रह्म पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है. द्वापर युग में प्रभु श्रीकृष्ण ने आज के ही दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था, इसीलिए आज का दिन गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है. आज की एकादशी मोह का क्षय करनेवाली ह

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Dec 1, 20253 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी Sunday, 30 November 2025 गुलाबी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर बाँकी गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) प्रीत बंधी श्रीवल्लभ पदसों और न मन में आवे हो । पढ़ पुरान षट दरशन नीके जो कछु कोउ बतावे हो ।।१।। जबते अंगीकार कियोहे तबते न अन्य सुहावे हो । पाय महारस कोन मूढ़मति जित तित चित भटकावे हो ।।२।। जाके भाग्य फल या कलिमे शरण सोई जन आवेहो । नन्द नंदन को निज सेवक व्हे द्रढ़कर बांह गहावे हो ।।३।। जिन कोउ करो भूलमन

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Nov 30, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी Saturday, 29 November 2025 तृतीय घटा (लाल), प्रभुचरण श्री गुसांईजी के उत्सव की झांझ की बधाई बैठे श्रीमद वल्लभ रूप सुरंगे l अंग अंग प्रति भावन भूषण वृन्दावन संपति अंगे अंगे ll 1 ll दरस परस गिरिधर जू की नाई एन मेन व्रज राज ऊछंगे l पद्मनाभ देखे बनि आवे सुधि रही रास रसाल भ्रू भंगे ll 2 ll प्रभुचरण श्री गुसांईजी के उत्सव की झांझ की बधाई बैठवे की बधाई विशेष – आज प्रभुचरण श्री गुसांईजी के उत्सव की झांझ की बधाई पंद्रह दिवस की बैठती है. आज से आगामी पंद्रह

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Nov 29, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी Friday, 28 November 2025 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज कृत सात स्वरुप का उत्सव सभी वैष्णवों को नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज कृत सात स्वरुप के उत्सव की बधाई विशेष – आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज कृत सात स्वरुप के उत्सव का दिवस है. श्री गोवर्धनेशजी महाराज श्री ने मेवाड़ में सर्वप्रथम वि.सं.1796 में आज के दिन सप्तस्वरूपोत्सव किया था. श्रीजी का सेवाक्रम - उत्सव होने के कारण

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Nov 28, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी Thursday, 27 November 2025 श्री गुसांईजी के चतुर्थ पुत्र श्री गोकुलनाथजी का प्राकट्योत्सव विशेष – आज श्री गुसांईजी के चतुर्थ पुत्र श्री गोकुलनाथजी का उत्सव है. पुष्टिसम्प्रदाय के हितों के रक्षणकर्ता, श्री वल्लभ के सिद्धांतों को वार्ता आदि के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने वाले श्री गोकुलनाथजी का यह पुष्टिमार्ग सदा ऋणी रहेगा. ऐसे पुष्टि के यश स्वरुप वैष्णव प्रिय श्री गोकुलनाथजी के प्राकट्योत्सव की बधाई ( गोकुलनाथजी का विस्तुत विवरण अन्य पोस्ट में )

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Nov 27, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी Wednesday, 26 November 2025 पीले साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर दुरंगी पाग पर बाँकी गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : टोडी) आये अलसाने लाल जोयें हम सरसाने अनत जगे हो भोर रंग राग के l रीझे काहू त्रियासो रीझको सवाद जान्यो रसके रखैया भवर काहू बाग़ के ll 1 ll तिहारो हु दोस नाहि दोष वा त्रिया को जाके रससो रस पागे जाग के l ‘तानसेन’ के प्रभु तुम बहु नायक आते जिन बनाय सांवरो पेच पाग के ll 2 ll साज – श्रीजी में आज पीले रंग की सुरम

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Nov 26, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी Tuesday, 25 November 2025 श्रीजी में श्रीनवनीतप्रियाजी का द्वितीय मंगलभोग, श्री मदनमोहनजी (कामवन) का पाटोत्सव आज श्रीजी को पतंगी रंग के साटन पर सुनहरी ज़री की किनारी के फूलों से सुसज्जित सूथन, चोली घेरदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) सुन मेरो वचन छबीली राधा, तै पायो रससिन्धु अगाधा ।।१।। जे रस निगम नेति नेति भाख्यो ताकौ ते अधरामृत चाख्यो ।।२।। शिव विरंचि के ध्यान न आवे,ताकौ कुंजनि कुसुम बिनावे ।।३।। तू वृषभा

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Nov 25, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी Monday, 24 November 2025 शीतकाल के सेहरा को प्रथम श्रृंगार मंगल भीनी प्यारी रात। नवल रंग देखो, देखो कुंज सुहात ।।ध्रु।। दुल्हनि प्यारी राधिका दुल्हे नंद सुजान । ब्याह रच्यो संकेत सदन ललिता रचित बितान ।। चहल पहल आनंद महेलमें जों न रूप दरसात । दुलहनिको मुख निरखके पिय ईकटक रही जात।। अंस भुजा कर दोऊ चलत हंसगती चाल । गावत मंगल रीत सों चलेहें भावते भवन ।। कुसुम सेज विहरत दोऊ जहां न कोऊ पांस । यह जोरी छबी देख कें बल बल

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Nov 24, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल तृतीया Sunday, 23 November 2025 हरे साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) चलरी सखी नंदगाम जाय बसिये ।खिरक खेलत व्रजचन्दसो हसिये ।।१।। बसे पैठन सबे सुखमाई । ऐक कठिन दुःख दूर कन्हाई ।।२।। माखनचोरे दूरदूर देखु । जीवन जन्म सुफल करी लेखु ।।३।। जलचर लोचन छिन छिन प्यासा । कठिन प्रीति परमानंद दासा ।।४।। साज – श्रीजी में आज हरे रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया

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Nov 23, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया Saturday, 22 November 2025 दूज को चंदा (चंदा उगे को श्रृंगार) बनठन कहां चले अैसी को मन भायी सांवरेसे कुंवर कन्हाई । मुख तो सोहे जैसे दूजको चंदा छिप छिप देत दिखाई ।।१।। चले ही जाओ नेक ठाड़े रहो किन अैसी शिख शिखाई । नंददास प्रभु अबन बनेगी निकस जाय ठकुराई ।।२।। ( आज शयन समय प्रभु के सनमुख गाये जाने वाला अद्भुत कीर्तन ) विशेष – नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराज ने तत्कालीन परचारक श्

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Nov 22, 20253 min read


व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा
व्रज – मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा Friday, 21 November 2025 फ़िरोज़ी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर पचरंगी छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : तोड़ी) अबही डार देरे ईडुरिया मेरी पचरंगी पाटकी । हाहाखात तेरे पैया परत हो इतनो लालच मोहि मथुरा नगरके हाटकी ।।१।। जो न पत्याऊ जाय किन देखो मनमोहन हैज़ु नाटकी । मदन मोहन पिय झगरो कौन वध्यो सो देखेंगी लुगाई वाटकी ।।२।। साज – श्रीजी में आज फ़िरोज़ी रंग की साटन (Satin) की रुपहली ज़री

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Nov 21, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या Thursday, 20 November 2025 अरि हों श्याम रंग रंगी । रिझवे काई रही सुरत पर सुरत मांझ पगी ।।१।। देख सखी अेक मेरे नयनमें बैठ रह्यो करी भौन । घेनु चरावन जात वृंदावन सौंधो कनैया कोन ।।२।। कौन सुने कासौ कहे सखी कौन करे बकवाद । तापे गदाधर कहा कही आवे गूंगो गुड़को स्वाद ।।३।। द्वितीय (स्याम) घटा विशेष – श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋत

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Nov 20, 20253 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी Wednesday, 19 November 2025 गुलाबी साटन के चाकदार वागा पर श्रीमस्तक पर पचरंगी पाग पर जमाव के क़तरा व तुर्री के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : तोड़ी) अबही डार देरे ईडुरिया मेरी पचरंगी पाटकी । हाहाखात तेरे पैया परत हो इतनो लालच मोहि मथुरा नगरके हाटकी ।।१।। जो न पत्याऊ जाय किन देखो मनमोहन हैज़ु नाटकी । मदन मोहन पिय झगरो कौन वध्यो सो देखेंगी लुगाई वाटकी ।।२।। साज – श्रीजी में आज गुलाबी रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़

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Nov 19, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी (द्वितीय)
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी (द्वितीय) Monday, 18 November 2025 मेघश्याम साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : टोडी) आये अलसाने लाल जोयें हम सरसाने अनत जगे हो भोर रंग राग के l रीझे काहू त्रियासो रीझको सवाद जान्यो रसके रखैया भवर काहू बाग़ के ll 1 ll तिहारो हु दोस नाहि दोष वा त्रिया को जाके रससो रस पागे जाग के l ‘तानसेन’ के प्रभु तुम बहु नायक आते जिन बनाय सांवरो पेच पाग के ll 2 ll साज – श्रीजी में आज पीले रंग

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Nov 18, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी (प्रथम)
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी (प्रथम) Monday, 17 November 2025 श्री गुसांईजी के सप्तम लालजी श्री घनश्यामजी का प्राकट्योत्सव विशेष – आज श्री गुसांईजी के सप्तम लालजी श्री घनश्यामजी का प्राकट्योत्सव है. श्री गुसांईजी ने आपको श्री मदनमोहनजी का स्वरुप सेवा हेतु प्रदान किया था. आज श्री घनश्यामजी की ओर से श्रीजी को कुल्हे जोड़ का श्रृंगार धराया जाता है. श्री घनश्यामजी षडऐश्वर्य में वैराग्य के स्वरुप थे अतः प्रभु को मयूरपंख की जोड़, प्रभु में आपका अनुराग था अतः अनुराग के भाव के लाल

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Nov 17, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी Sunday, 16 November 2025 प्रथम द्वादशी (चोकी) के शृंगार आज प्रभु को बैंगनी घेरदार वस्त्र पर सुनहरी ज़री की फतवी (आधुनिक जैकेट जैसी पौशाक) धरायी जाती है. प्रभु की कटि (कमर) पर एक विशेष हीरे का चपड़ास (गुंडी-नाका) श्रीमस्तक पर सुनहरी चीरा (ज़री की पाग) के ऊपर लूम की सुनहरी किलंगी धरायी जाती है. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आशावरी) व्रज के खरिक वन आछे बड्डे बगर l नवतरुनि नवरुलित मंडित अगनित सुरभी हूँक डगर ll 1 ll जहा तहां दधिमंथन घरमके प्रमुदित माख

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Nov 16, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्णा एकादशी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्णा एकादशी Saturday, 15 November 2025 उत्पति एकादशी व्रत बात हिलगही कासों कहिये। सुनरी सखी बिवस्था या तनकी समझ समझ मन चुप करी रहिये ॥१॥ मरमी बिना मरम को जाने यह उपहास जग जग सहिये। चतुर्भुजप्रभु गिरिधरन मिले जबही, तबही सब सुख पहिये ॥२॥ आज का श्रृंगार ऐच्छिक है परन्तु किरीट, खोंप, सेहरा अथवा टिपारा धराया जाता है. रुमाल एवं गाती का पटका भी धराया जाता है. श्रृंगार जड़ाव का धराया जाता है. आज की सेवा श्री ललिता जी की सखी कुंजरी जी की ओर से होती है. आज श्रीजी को

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Nov 15, 20252 min read
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