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व्रज – माघ शुक्ल द्वादशी
व्रज – माघ शुक्ल द्वादशी Friday, 30 January 2026 केसरी लट्ठा के घेरदार वागा ,केसरी पटका एवं श्रीमस्तक पर केसरी गोल पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : वसंत) (अष्टपदी) खेलत वसंत गिरिधरनलाल, कोकिल कल कूजत अति रसाल ll 1 ll जमुनातट फूले तरु तमाल, केतकी कुंद नौतन प्रवाल ll 2 ll तहां बाजत बीन मृदंग ताल, बिचबिच मुरली अति रसाल ll 3 ll नवसत सज आई व्रजकी बाल, साजे भूखन बसन अंग तिलक भाल ll 4 ll चोवा चन्दन अबीर गुलाल, छिरकत पिय मदनगुपाल लाल ll 5 ll आलिंगन चुम्ब

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Jan 302 min read


व्रज – माघ शुक्ल एकादशी
व्रज – माघ शुक्ल एकादशी Thursday, 29 January 2026 गुलाबी लट्ठा के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गुलाबी ग्वालपगा के ऊपर पगा चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) श्याम सुभगतन शोभित छींटे नीकी लागी चंदनकी । मंडित सुरंग अबीरकुंकुमा ओर सुदेश रजवंदनकी ।।१।। कुंभनदास मदन तनमन बलिहार कीयो नंदनंदनकी । गिरिधरलाल रची विधि मानो युवति जन मन कंदनकी ।।२।। साज – आज श्रीजी में श्वेत मलमल की सादी पिछवाई धरायी जाती है जिसके ऊपर गुलाल, चन्दन से खेल किया जाता ह

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Jan 291 min read


व्रज – माघ शुक्ल दशमी
व्रज – माघ शुक्ल दशमी Wednesday, 28 January 2026 सेहरा के श्रृंगार आज प्रभु के कपोल पर कमल पत्र नहीं मांडे जाते, रोपणी से मांडे जाते हैं. राजभोग में दुमाला को गुलाल, अबीर आदि सब से खेलाया जाता हैं. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : वसंत) देखो राधा माधो,सरस जोर, खेलत बसंत पिय नवल किशोर।।ध्रु। ईत हलधर संग,समस्त बाल।। मधि नायक सोहे नंदलाल।। उत जुवती जूथ,अदभूत रूप।। मधि नायक सोहें,स्यामा अनूप।।१।। बहोरि निकसि चले जमुनातीर,।। मानों रति नायक जात धीर।। देखत रति नायक बने जाय।।

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Jan 282 min read


व्रज – माघ शुक्ल नवमी
व्रज – माघ शुक्ल नवमी Tuesday, 27 January 2026 श्वेत लट्ठा के घेरदार वागा ,कटि (कमर) पर एक विशेष स्वर्ण का चपड़ास (घुंडी-नाका) एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) श्याम सुभगतन शोभित छींटे नीकी लागी चंदनकी । मंडित सुरंग अबीरकुंकुमा ओर सुदेश रजवंदनकी ।।१।। कुंभनदास मदन तनमन बलिहार कीयो नंदनंदनकी । गिरिधरलाल रची विधि मानो युवति जन मन कंदनकी ।।२।। साज – आज श्रीजी में श्वेत मलमल की सादी पिछ

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Jan 272 min read


व्रज – माघ शुक्ल अष्टमी
व्रज – माघ शुक्ल अष्टमी Monday, 26 January 2026 श्वेत लट्ठा के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर लाल फेटा पर फेटा के साज के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : वसंत) श्रीवृंदावन खेलत गुपाल, बनि बनि आई व्रजकी बाल ll 1 ll नवसुंदरी नवतमाल, फूले नवल कमल मधि नव रसाल ll 2 ll अपने कर सुंदर रचित माल, अवलंबित नागर नंदलाल ll 3 l नव गोप वधू राजत हे संग, गजमोतिन सुंदर लसत मंग ll 4 ll नवकेसर मेद अरगजा धोरि, छिरकत नागरिकों नवकिशोर ll 5 ll तहां गोपीग्वाल सुंदर सुदेश, राजत माला विविध क

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Jan 262 min read


व्रज – माघ शुक्ल सप्तमी
व्रज – माघ शुक्ल सप्तमी Sunday, 25 January 2026 और राग सब भये बाराती दूल्हे राग बसंत। मदन महोत्सव आज सखि री बिदा भयो हेमंत।। मधुरे सुर कोकिल कल कूजत बोलती मोर हँसत।। गावती नारि पंचम सुर ऊँचे जैसे पिक गुनवंत ।। हाथन लइ कनक पिचकाई मोहन चाल चलंति।। कुम्भनदास श्यामा प्यारी कों मिल्यो हे भांमतो कंत।। बसंत पंचमी के दो दिन बाद आज श्रीजी में नियम से श्वेत लट्ठा के घेरदार वागा के ऊपर गुलाबी झाँई फ़तवी धरायी जाती है. फ़तवी आधी बाँहों वाली एक बंडी या जैकेट जैसी पौशाक होती है जो कि शीतकाल

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Jan 252 min read


व्रज – माघ शुक्ल षष्ठी
व्रज – माघ शुक्ल षष्ठी Saturday, 24 January 2026 श्वेत रंग के गुलाबी आभा युक्त चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर कुल्हे जोड़ के ऊपर सुनहरी घेरा के श्रृंगार आज श्रीजी को नियम से गुलाबी आभायुक्त चाकदार वस्त्र एवं श्रीमस्तक पर कुल्हे जोड़ के ऊपर सुनहरी घेरा धराया जाता है. यह श्रृंगार प्रतिवर्ष बसंत-पंचमी के एक दिन पश्चात नियम से होता है. आज दो समय की आरती थाली की आती हैं. आज से डोलोत्सव तक प्रतिदिन श्रीजी प्रभु में राजभोग दर्शन में गुलाल खेल होगा. श्री नवनीतप्रियाजी को ग्वाल व र

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Jan 242 min read


व्रज – माघ शुक्ल पंचमी
व्रज – माघ शुक्ल पंचमी Friday, 23 January 2026 बसंत-पंचमी नवल वसंत नवल वृंदावन खेलत नवल गोवर्धनधारी । हलधर नवल नवल ब्रजबालक नवल नवल बनी गोकुल नारी ।।१।। नवल जमुनातट नवल विमलजल नौतन मंद सुगंध समीर । नवल कुसुम नव पल्लव साखा कुंजत नवल मधुप पिक कीर ।।२।। नव मृगमद नव अरगजा वंदन नौतन अगर सुनवल अबीर । नवचंदन नव हरद कुंकुमा छिरकत नवल परस्पर नीर ।।३।। नवलधेनु महुवरि बाजे, अनुपम भूषण नौतन चीर । नवलरूप नव कृष्णदास प्रभुको, नौतन जस गावत मुनि धीर ।।४।। सभी वैष्णवजन को बसंतोत्सव की ख़ूबख़ू

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Jan 232 min read


व्रज – माघ शुक्ल चतुर्थी
व्रज – माघ शुक्ल चतुर्थी Thursday, 22 January 2026 शिशिर रितुको आगम भयो प्यारी बीदा भयो हेमंत । विरहिनके भाग्यते आलि आवत चल्यो वसंत ।।१।। ताहि दुतिकाके भवन बसे जहां भांवर लीने कंत । कुम्भनदास प्रभु वा जाडेको आय रह्यो हे अंत ।।२।। प्रभु के सेवाक्रम में प्रत्येक ऋतु का परिवर्तन उसके आगमन और प्रस्थान के समय अद्भुत क्रमानुसार होता है. जिस प्रकार कोई भी ऋतु एकदम से नहीं परिवर्तित नहीं हो जाती वरन धीरे धीरे कई भागों में परिवर्तित होती है उसी प्रकार पुष्टिमार्ग म

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Jan 224 min read


व्रज – माघ शुक्ल तृतीया
व्रज – माघ शुक्ल तृतीया Wednesday, 21 January 2026 हरी सलीदार ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) गोपालको मुखारविंद जियमें विचारो । कोटि भानु कोटि चंद्र मदन कोटि वारो ।।१।। कमलनैन चारूबैन मधुर हास सोहे । बंक अवलोकन पर जुवती सब मोहे ।।२।। धर्म अर्थ काम मोक्ष सब सुख के दाता । चत्रभूज प्रभु गोवर्धनधर गोकूलके त्राता।।३।। साज – श्रीजी में आज हरे रंग की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछ

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Jan 211 min read


व्रज – माघ शुक्ल द्वितीया
व्रज – माघ शुक्ल द्वितीया Tuesday, 20 January 2026 लाल ज़री के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) प्रीत बंधी श्रीवल्लभ पदसों और न मन में आवे हो । पढ़ पुरान षट दरशन नीके जो कछु कोउ बतावे हो ।।१।। जबते अंगीकार कियोहे तबते न अन्य सुहावे हो । पाय महारस कोन मूढ़मति जित तित चित भटकावे हो ।।२।। जाके भाग्य फल या कलिमे शरण सोई जन आवेहो । नन्द नंदन को निज सेवक व्हे द्रढ़कर बांह गहावे हो ।।३।। जिन कोउ करो भूलमन शंका

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Jan 202 min read


व्रज– माघ शुक्ल प्रतिपदा
व्रज– माघ शुक्ल प्रतिपदा Monday, 19 January 2026 कत्थई ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर दोहरा क़तरा के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) गोपालको मुखारविंद जियमें विचारो । कोटि भानु कोटि चंद्र मदन कोटि वारो ।।१।। कमलनैन चारूबैन मधुर हास सोहे । बंक अवलोकन पर जुवती सब मोहे ।।२।। धर्म अर्थ काम मोक्ष सब सुख के दाता । चत्रभूज प्रभु गोवर्धनधर गोकूलके त्राता।।३।। साज – श्रीजी में आज कत्थई रंग की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पि

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Jan 191 min read


व्रज – माघ कृष्ण अमावस्या
व्रज – माघ कृष्ण अमावस्या Sunday, 18 January 2026 फूली फूली डोले सोने के सदन मदन मोहन रसमाती । रसबस कीये सुहाग बिहारन मंदमद मुसकायनी ।।१।। बैयां जोर परस्पर दोऊ लाडिली फेर जु लड़ाती । हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी रस बरसत वो हो माती ।।२।। एकादश (सुनहरी) घटा विशेष – आज श्रीजी में शीतकाल की अंतिम सुनहरी घटा है. विशेष – ‘फूली फूली डोले सोने के सदन मदन मोहन रसमाती’ उपरोक्त कीर्तन के भाव के आधार पर प्रभु स्वर्ण भवन में व्रजभक्तों के साथ विहार कर रहे हैं इस भाव से आज श्रीजी में

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Jan 182 min read


व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी
व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी Saturday, 17 January 2026 पतंगी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग :सारंग) मेरी अखियन के भूषण गिरिधारी । बलि बलि जाऊ छबीली छबि पर अति आनंद सुखकारी ।।१।। परम उदार चतुर चिंतामनिवदरस दरस दुं दु़:खहारी । अतुल प्रताप तनक तुलसी दल मानत सेवा भारी ।।२।। छीतस्वामी गिरिधरन विसद यश गावत गोकुलनारी । कहा वरनौ गुन गाथ नाथके श्रीविट्ठल ह्रदय विहारी ।।३।। साज – श्रीजी में आज पतंगी मखमल पर काँच के टुकड़

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Jan 171 min read


व्रज – माघ कृष्ण त्रयोदशी
व्रज – माघ कृष्ण त्रयोदशी Friday, 16 January 2026 हरे छिट के साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर टीपारा का साज के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : तोड़ी) सोने की मटुकिया, जराव की इंडुरिया, श्याम प्रेम भरी भूल गयी गोरस।। प्रीतम को नाम ले ले, कहेत लेओरी कोऊ, ब्रजमें डोलत बोलत है चहुँओ रस || १|| चलो श्याम सुन्दर एकांत दधि खाइए, न जात तजे वाको रस।। “तानसेन" के प्रभु हौंजू कहतहों, साँझ भई रटत निकसी हुती भोरस।। २ ।। साज – आज श्रीजी में हरे रंग की साटन की छिट की शीतकाल की पि

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Jan 161 min read


व्रज – माघ कृष्ण एकादशी
व्रज – माघ कृष्ण एकादशी Wednesday, 14 January 2026 षट्तिला एकादशी, उत्तरायण पर्व मकर-संक्रांति, मलार मठा खींच को लोंदा। जेवत नंद अरु जसुमति प्यारो जिमावत निरखत कोदा॥ माखन वरा छाछ के लीजे खीचरी मिलाय संग भोजन कीजे॥ सखन सहित मिल जावो वन को पाछे खेल गेंद की कीजे॥ सूरदास अचवन बीरी ले पाछे खेलन को चित दीजे॥ श्रीजी में आज रेशमी छींट के वस्त्र धराये जाते हैं. प्रभु के समक्ष नयी गेंदे धरी जाती है. सभी समां में गेंद खेलने के पद गाये जाते हैं. श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग

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Jan 143 min read


व्रज – माघ कृष्ण दशमी
व्रज – माघ कृष्ण दशमी Tuesday, 13 January 2026 पिले साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) आज श्रृंगार निरख श्यामा को नीको बन्यो श्याम मन भावत । यह छबि तनहि लखायो चाहत कर गहि के मुखचंद्र दिखावत ।।१।। मुख जोरें प्रतिबिम्ब विराजत निरख निरख मन में मुस्कावत । चतुर्भुज प्रभु गिरिधर श्री राधा अरस परस दोऊ रीझि रिझावत ।।२।। साज – श्रीजी को आज पिले साटन पर सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया व

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Jan 131 min read


व्रज – माघ कृष्ण नवमी
व्रज – माघ कृष्ण नवमी Monday, 12 January 2026 मेघश्याम साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) गोपालको मुखारविंद जियमें विचारो । कोटि भानु कोटि चंद्र मदन कोटि वारो ।।१।। कमलनैन चारूबैन मधुर हास सोहे । बंक अवलोकन पर जुवती सब मोहे ।।२।। धर्म अर्थ काम मोक्ष सब सुख के दाता । चत्रभूज प्रभु गोवर्धनधर गोकूलके त्राता।।३।। साज – श्रीजी में आज मेघश्याम रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया वाली श

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Jan 121 min read


व्रज – माघ कृष्ण अष्टमी
व्रज – माघ कृष्ण अष्टमी Sunday, 11 January 2026 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े दामोदरजी (दाऊजी) महाराज का उत्सव विशेष – श्री गोवर्धनधरण प्रभु जिनके यहाँ व्रज से मेवाड़ पधारे, आज श्रीजी में उन नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े दामोदरजी (दाऊजी) का उत्सव है. आपका प्राकट्य श्री लाल-गिरधरजी महाराज के यहाँ विक्रम संवत १७११ में गोकुल में हुआ. आप अद्भुत स्वरुपवान थे एवं सदैव अदरक एवं गुड़ अपने साथ रखते थे एवं अरोगते थे. इसी भाव से आज श्रीजी को विशिष्ट सामग्रियां भी अरोगायी

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Jan 113 min read


व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी (द्वितीय)
व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी (द्वितीय) Saturday, 10 January 2026 मोरको शिर मुकुट दीये मोर ही की माला । दुल्हीनसि राधाजु दुल्हे नंदलाला ।।१।। वचन रचन चारु हास गावत व्रजबाला । धोंधी के प्रभु राजत है मंडप गोपाला ।।२।। शीतकाल के सेहरा का तृतीय श्रृंगार शीतकाल में श्रीजी को चार बार सेहरा धराया जाता है. इनको धराये जाने का दिन निश्चित नहीं है परन्तु शीतकाल में जब भी सेहरा धराया जाता है तो प्रभु को मीठी द्वादशी आरोगाई जाती हैं. आज प्रभु को गुड़ की मीठी लापसी (द्वादशी) आरोगाई जाती हैं. आज

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Jan 102 min read
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