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व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी Friday, 14 November 2025 प्रथम घटा (हरी) विशेष – श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋतु में विविध रंगों के बादलों के गहराने से जिस प्रकार घटा बनती है उसी भाव से श्रीजी में मार्गशीर्ष व पौष मास में विविध रंगों की द्वादश घटाएँ द्वादश कुंज के भाव से होती हैं. कई वर्षों पहले चारों यूथाधिपतिओं के भाव से चार घटाएँ होती थी परन्तु गौस्वामी वंश परंपरा के सभी तिल

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Nov 14, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी Thursday, 13 November 2025 शीतकाल का प्रथम सखड़ी मंगलभोग आज की सेवा श्री कृष्णावतीजी की ओर से होती है. आज विशेष रूप से मोती के काम वाले वस्त्र, गोल-पाग एवं श्रृंगार आदि नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री दामोदरलालजी महाराजश्री की आज्ञा से धराये जाते हैं. कीर्तन भी मोती की भावना वाले गाये जाते हैं. कल मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी को श्रीजी में प्रथम (हरी) घटा होगी. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) मोती तेहू ठोर सबरारे l जबहि तेरे गई चितवत उत जब नंदल

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Nov 13, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी Wednesday, 12 November 2025 श्रीविठ्ठलनाथजुके आज बधाई । मार्गशिर कृष्ण अष्टमीको शशी उदयो पूरण माई ।।१।। पूरे चोक धाम मोतिनके बंदनवार बंधाई । ध्वजा पताका दीप कलश सज धूप सुगंध महाई ।।२।। बाजत ढोल निशान नगारे झांझ झमक सहनाई । गगन विमानन छाय रह्यो है देव कुसुम बरखाई ।।३।। श्रुति मुख बोलत जय जय बोलत डोलत चहुर्दिश धाई । रसिकदास मतिहीन दीन अति गोविंद नाम कहाई ।।४।। श्री गुसांईजी के द्वितीय पुत्र नित्यलीलास्थ गौस्वामी श्री गोविन्दरायजी का प्राकट्योत्सव

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Nov 12, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण सप्तमी Tuesday, 12 November 2025 नाथद्वारा के युगपुरुष नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराजश्री का प्राकट्योत्सव विशेष – आज वर्तमान पूज्य तिलकायत गौस्वामी श्री राकेशजी महाराजश्री के पितृचरण एवं नाथद्वारा के इतिहास के युगपुरुष कहलाने वाले नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराज श्री का प्राकट्योत्सव है.(विस्तुत विवरण अन्य पोस्ट में) आज की सेवा श्री रसालिकाजी एवं श्री ललिताजी के भाव से होती है. श्रीजी को नियम के पतंगी साटन के घेरद

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Nov 11, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी Monday, 10 November 2025 फ़िरोज़ी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।।

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Nov 10, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी(चतुर्थी क्षय)
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी(चतुर्थी क्षय) Sunday, 09 November 2025 पाछली रात के श्रृंगार विशेष – आज श्रीजी को नियम का ‘पाछली रात का श्रृंगार’ धराया जाएगा. इस श्रृंगार को धराये जाने का दिन नियत नहीं परंतु इन दिनों में अवश्य धराया जाता है. इस शृंगार में चीरा एवं मोजाजी सुनहरी धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर मोर चन्द्रिका एवं पिछवाई नियम के धराये जाते हैं. घेरदार वागा एवं ठाड़े वस्त्र इच्छा अनुसार धराये जासकते हैं. ये व्रतचर्या के दिन हैं. व्रतचर्या के दिनों में गोप-कुमारियाँ प्र

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Nov 9, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया Saturday, 08 November 2025 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री दाऊजी कृत छह स्वरुप का उत्सव आज के दिन छः स्वरुप पधारे थे अतः श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में चन्द्रावलीजी के भाव से यशस्वरुप चन्द्रमा की भांति स्वच्छ सफेद चाशनी वाली चन्द्रकला और विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसरयुक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है वहीँ सखड़ी में मीठी सेव व केशरयुक्त पेठा अरोगाये जाते हैं. राजभो

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Nov 8, 20252 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया Friday, 07 November 2025 हरे साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर फ़ीरोज़ा का जड़ाऊ ग्वालपगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग :आसावरी) चल री सखी नंदगाव जई बसिये,खिरक खेलत व्रजचंद सो हसिये ।।१।। बसत बठेन सब सुखमाई,कठिन ईहै दुःख दूरि कन्हाई ।।२।। माखन चोरत दूरि दूरि देख्यों,सजनी जनम सूफल करि लेखों ।।३।। जलचर लोचन छिन छिन प्यासा, कठिन प्रीति परमानंददासा ।।४।। साज – श्रीजी में आज सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के क

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Nov 7, 20251 min read


व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा
व्रज – मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा Thursday, 06 November 2025 व्रतचर्या/गोपमास आरम्भ मार्गशीर्ष अर्थात ‘गोपमास’ एवं पौष अर्थात ‘धनुर्मास’ अत्यधिक सर्दी वाले मास हैं, अतः देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन से बसंत पंचमी तक पुष्टि स्वरुप निज मंदिर से बाहर नहीं पधारते. श्री नवनीतप्रियाजी आदि जो स्वरुप पलना झूलते हैं उनके पलना के दर्शन भी निज मंदिर में ही होते हैं. आज श्रीजी को नियम के पतंगी (गहरे लाल) रंग के साटन के वस्त्र एवं मोरचन्द्रिका धरायी जाती है. लाल रंग अनुराग का रंग है. श्री लल

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Nov 6, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा
व्रज - कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा Wednesday, 05 November 2025 कार्तिक पूर्णिमा, गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराजश्री कृत चार स्वरूपोत्सव विशेष – आज कार्तिक पूर्णिमा है. आज कार्तिक मास (व्रज अनुसार) का अंतिम दिन है. कल से गोपमास प्रारंभ हो जायेगा. ललित, पंचम आदि शीतकाल के राग व खंडिता, हिलग आदि कीर्तन गाये जाते हैं. कार्तिक, मार्गशीर्ष एवं पौष, ये तीनों मास ललिताजी की सेवा के मास हैं. इनमें से एक मास आज पूर्ण होता है. आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दल

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Nov 5, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी
व्रज - कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी Tuesday, 04 November 2025 नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोविन्दजी का प्राकट्योत्सव (विशेष आलेख अन्य पोस्ट में) विशेष – आज नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोविन्दजी (१८७६) का उत्सव है. श्रीजी का सेवाक्रम - उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं. सभी समय झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. दो समय की आरती थाली में की जाती है. श्रीजी को नियम के पीले खीनखाब के

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Nov 4, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी (द्वादशी क्षय)
व्रज - कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी (द्वादशी क्षय) Monday, 03 November 2025 मोर के चंदन मोर बन्यौ है दिन दूल्हे हैं अलि नंद को नंदन। श्री वृषभानु सुता दुलही दिन जोड़ी बनी विधना सुखकंदन।। आवै कह्यौ न कछु रसखानि हो दोऊ बंधे छवि प्रेम के फंदन । जाहि विलोकें सबै सुख पावत ये ब्रजजीवन हैं दुखदंदन ।। गुसांई जी के प्रथम पुत्र श्री गिरधरजी एवं पंचम पुत्र श्री रघुनाथजी (कामवन) के प्राकट्योत्सव के शृंगार, लालाजी का अन्नकूट, घेरदार वागा एवं चीरा के साथ सेहर

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Nov 3, 20254 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल एकादशी
व्रज - कार्तिक शुक्ल एकादशी Sunday, 02 November 2025 देव प्रबोधिनी एकादशी व्रत (देव-दीवाली) "देव दिवारी शुभ एकादशी" की खूब खूब बधाई देव दिवारी शुभ एकादशी, हरी प्रबोध कीजे हो आज।। निंद्रा तजो उठो हो गोविंद, सकल विश्र्व हित काज।।१।। घर घर मंगल होत सबनके, ठौर ठौर गावत ब्रिजनारी।। "परमानंद दास" को ठाकुर, भक्त हेत लीला अवतारी।।२।। देव प्रबोधिनी एकादशी (देव-दीवाली) आज प्रभु को नियम के सुनहरी ज़री के चाकदार वागा व श्रीमस्तक पर जड़ाव की कुल्हे के ऊपर पांच मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ धराय

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Nov 2, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल दशमी
व्रज - कार्तिक शुक्ल दशमी Saturday, 01 November 2025 आगम का श्रृंगार, छप्पनभोग (बड़ा) मनोरथ आज श्रीनाथजी में किन्हीं वैष्णव द्वारा आयोजित छप्पनभोग का मनोरथ होगा. नियम (घर) का छप्पनभोग वर्ष में केवल एक बार मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को ही होता है. इसके अतिरिक्त विभिन्न खाली दिनों में वैष्णवों के अनुरोध पर श्री तिलकायत महाराज की आज्ञानुसार मनोरथी द्वारा छप्पनभोग मनोरथ आयोजित होते हैं. इस प्रकार के मनोरथ सभी वैष्णव मंदिरों एवं हवेलियों में होते हैं जिन्हें सामान्यतया ‘बड़ा मनोरथ’ क

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Nov 1, 20253 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल नवमी
व्रज - कार्तिक शुक्ल नवमी Friday, 31 October 2025 अक्षय नवमी इस तिथी का कभी क्षय नहीं होता और आज के दिन किये गये पुण्य व कर्म का क्षय नहीं होता अतः आज की तिथी अक्षय नवमी कहलाती है. आज के दिन से जुड़ा हुआ एक प्रसंग आपसे साझा करना चाहूँगा जो की नित्यलीलास्थ श्री कृष्णरायजी से जुड़ा हुआ हैं. प्रभु श्री विट्ठलनाथजी की कृपा से द्वितीय गृह अत्यन्त वैभवपूर्ण स्वरुप में था और तत्समय श्रीजी में अत्यधिक ऋण हो गया. जब आपको यह ज्ञात हुआ तब आपने अपना अहोभाग्य मान कर प्रभु सुखार्थ अपना द्रव

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Oct 31, 20253 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल अष्टमी
व्रज - कार्तिक शुक्ल अष्टमी Thursday, 30 October 2025 गोपाष्टमी मंगला दर्शन उपरांत प्रभु को चन्दन, आवंला, एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है. पिछवाई श्याम आधारवस्त्र पर खण्डों में कशीदे की श्वेत गायों की आती है. गौचारण के भाव से आज प्रभु को नियम का मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है. मुकुट के इस श्रृंगार के विषय में मैं पहले भी कई बार बता चुका हूँ कि प्रभु को मुख्य रूप से तीन लीलाओं (शरद-रास, दान और गौ-चारण) के भाव से मुकुट का श्रृंगार धराया जाता है.

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Oct 30, 20253 min read
व्रज - कार्तिक शुक्ल सप्तमी
व्रज - कार्तिक शुक्ल सप्तमी Wednesday, 29 October 2025 पीली ज़री के चाकदार वागा, श्रीमस्तक पर फेटा पर फेटा का साज के श्रृंगार ये इन्द्रमान भंग के दिन है अतः कार्तिक शुक्ल तृतीया से अक्षय नवमी तक इन्द्रमान भंग के कीर्तन गाये जाते हैं. विशेष- विक्रम संवत २०६३ (वर्ष 2006) में आज सप्तमी के दिन पूज्य गोस्वामी तिलकायत श्री राकेशजी ने प्रभु श्री नवनीतप्रियाजी को व्रज पधराये थे. व्रज में लगभग एक माह आनंद वृष्टि कर कर प्रभु मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी के दिन पुनः नाथद्वारा पधारे थे. इस भ

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Oct 29, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल षष्ठी (द्वितीय)
व्रज - कार्तिक शुक्ल षष्ठी (द्वितीय) Tuesday, 28 October 2025 सुनहरी ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर चीरा (गोल पाग) पर पर गोल चन्द्रिका के शृंगार ये इन्द्रमान भंग के दिन है अतः कार्तिक शुक्ल तृतीया से अक्षय नवमी तक इन्द्रमान भंग के कीर्तन गाये जाते हैं. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : धनाश्री) कान्हकुंवर के कर पल्लव पर मानो गोवर्धन नृत्य करे । ज्यों ज्यों तान उठत मुरली में त्यों त्यों लालन अधर धरे ।।१।। मेघ मृदंगी मृदंग बजावत दामिनी दमक मानो दीप जरे । ग्वाल ताल दे नीके गा

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Oct 28, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल षष्ठी
व्रज - कार्तिक शुक्ल षष्ठी Monday, 27 October 2025 स्याम ख़िनख़ाब के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार ये इन्द्रमान भंग के दिन है अतः कार्तिक शुक्ल तृतीया से अक्षय नवमी तक इन्द्रमान भंग के कीर्तन गाये जाते हैं. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : धनाश्री) माधोजु राखो अपनी ओट । वे देखो गोवर्धन ऊपर उठे है मेघ के कोट ।।१।। तुम जो शक्रकी पूजा मेटी वेर कियो उन मोट l नाहिन नाथ महातम जान्यो भयो है खरे टे खोट ।।२।। सात घौस जल वर्ष सिरानो अचयो एक ही घोट l

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Oct 27, 20252 min read


व्रज - कार्तिक शुक्ल पंचमी
व्रज - कार्तिक शुक्ल पंचमी Sunday, 26 October 2025 लाभ पंचमी के शृंगार विशेष – लाभपंचमी को लौकिक पर्व माना गया है अतः आज के दिन श्रीजी में इस निमित कुछ विशेष नहीं होता. ये दिन गोवर्धन धारण व इन्द्रमान भंग के हैं अतः प्रातः से ही गोवर्धनलीला व इन्द्रमान भंग के कीर्तन गाये जाते हैं. पिछवाई भी गोवर्धनधारण की होती है. श्रीजी को लाल सलीदार ज़री के चाकदार वागा, चोली, सूथन, टिपारा व लाल मलमल का पटका धराया जाता है. आभरण वनमाला के परन्तु चरणारविन्द से चार अंगुल ऊपर धराये जाते हैं. श्री

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Oct 26, 20252 min read
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