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व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी
व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी Friday, 09 January 2026 पीरेही कुंडल नूपुर पीरे पीरो पीतांबरो ओढे ठाडो । पीरीही पाग लटक सिर सोहे पीरो छोर रह्यो कटि गाढो ।।१।। पीरी बनी कटि काछनी लालके पीरो छोर रच्यो पटुकाको । गोविन्द प्रभुकी लीला दरसत पीरोही लकुट लिये कर ठाडो ।।२।। दशम (पीली/बसंती) घटा विशेष – आज श्रीजी में शीतकाल की दशम (पीली) घटा है. विगत कल ही श्रीजी ने बसंत के आगम का श्रृंगार धराया है और बसंत ऋतु का आभास हो और हम तत्परता से बसंत का स्वागत करें इस भाव से आज श्रीजी में पीली घटा के

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Jan 93 min read


व्रज – माघ कृष्ण षष्ठी
व्रज – माघ कृष्ण षष्ठी Thursday, 08 January 2026 फ़िरोज़ी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।। साज –

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Jan 82 min read


व्रज – माघ कृष्ण पंचमी (चतुर्थी क्षय)
व्रज – माघ कृष्ण पंचमी (चतुर्थी क्षय) Wednesday, 07 January 2026 बसंत-पंचमी का प्रतिनिधि का श्रृंगार वसंत ऋतु आई फूलन फूले सब मिल गावोरी बधाई l कामनृपति रतिपति आवत है चहुर्दिश कामिनी भोंह सों चोंप चढ़ाई ll विशेष – आज बसंत-पंचमी का प्रतिनिधि का श्रृंगार धराया जाता है. सभी बड़े उत्सवों के पहले उस श्रृंगार का प्रतिनिधि का श्रृंगार धराया जाता है. विक्रमाब्द १९७०-७१ में तत्कालीन परचारक श्री दामोदरलालजी ने प्रभु प्रीति के कारण अपने पिता और तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी से विनती कर इस श्र

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Jan 72 min read


व्रज – माघ कृष्ण तृतीया
व्रज – माघ कृष्ण तृतीया Tuesday, 06 January 2026 गुलाबी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर चंद्रिका के श्रृंगार आज विशेष रूप से प्रभु की पीठिका पर अमरसी साटन की दग्गल किनारी के रूप में धरायी जाती है. वर्ष में ये एक ही बार धरायी जाती है. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बताव

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Jan 62 min read


व्रज – माघ कृष्ण द्वितीया
व्रज – माघ कृष्ण द्वितीया Monday, 05 January 2026 श्याम साटन के बसरा के मोती के काम के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर मोती की छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो । लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।। ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो । ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।। जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्

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Jan 51 min read


व्रज – माघ कृष्ण प्रतिपदा
व्रज – माघ कृष्ण प्रतिपदा Sunday, 04 January 2026 पिले साटन के घेरदार वागा पर श्याम ख़िनख़ाब की फतवी एवं श्रीमस्तक पर हीरा की पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आशावरी) व्रज के खरिक वन आछे बड्डे बगर l नवतरुनि नवरुलित मंडित अगनित सुरभी हूँक डगर ll 1 ll जहा तहां दधिमंथन घरमके प्रमुदित माखनचोर लंगर l मागधसुत वदत बंदीजन जस राजत सुरपुर नगरी नगर ll 2 ll दिन मंगल दीनि बंदनमाला भवन सुवासित धूप अगर l कौन गिने ‘हरिदास’ कुंवर गुन मसि सागर अरु अवनी कगर ll 3 ll

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Jan 41 min read


व्रज – पौष शुक्ल पूर्णिमा
व्रज – पौष शुक्ल पूर्णिमा Saturday, 03 January 2026 अरी में रतन जतन करि पायो । ऊधरे भाग आज सखी मेरे रसिक सिरोमनि आयो ।।१।। आवतही उठ के दे आदर आगे ढिंग बैठायो । मुख चुंबन दे अधर पान कर भेट सकल अंग लायो ।।२।। अद्भुत रूप अनूप श्यामको निरखत नैन सिरायो । निसदिन यही अपने ठाकुर को रसिक गुढ जश गायो ।।३।। श्वेत साटन के चागदार वागा गुलाबी गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर जड़ाऊ कूल्हे और मुकुट का पान के शृंगार विशेष – वर्षभर में बारह पूर्णिमा होती है जिनमें से आज के अतिरिक्त सभी ग्यारह पूर

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Jan 33 min read


व्रज – पौष शुक्ल चतुर्दशी
व्रज – पौष शुक्ल चतुर्दशी Friday, 02 January 2026 कहो तुम सांचि कहांते आये भोर भये नंदलाल । पीक कपोलन लाग रही है घूमत नयन विशाल ।।१।। लटपटी पाग अटपटी बंदसो ऊर सोहे मरगजी माल । कृष्णदास प्रभु रसबस कर लीने धन्य धन्य व्रजकी लाल ।।२।। नवम (पतंगी) घटा आज श्रीजी में पतंगी (गहरे गुलाबी) घटा के दर्शन होंगे. इसका क्रम नियत नहीं है और खाली दिन होने के कारण आज ली जा रही है. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) आजु नीको जम्यो राग आसावरी l मदन गोपाल बेनु नीको बाजे नाद सुनत भई बावरी ll 1

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Jan 22 min read


व्रज – पौष शुक्ल त्रयोदशी
व्रज – पौष शुक्ल त्रयोदशी Thursday, 01 January 2026 भोग श्रृंगार यशोदा मैया श्री बिटठ्लनाथ के हाथ को भावे । नीके न्हवाय श्रृंगार करतहे आछी रूचिसो मोहि पाग बॅधावे ।।१।। ताते सदाहो उहाहि रहत हो तू डर माखन दुध छिपावे । छीतस्वामी गिरिधरन श्री बिटठ्ल निरख नयना त्रैताप नसावे ।।२।। शीतकाल की चतुर्थ चौकी के वस्त्र श्रृंगार निश्चित हैं. आज प्रभु को श्याम खीनखाब के चाकदार वस्त्र एवं श्रीमस्तक पर जड़ाव के ग्वाल-पगा के ऊपर सादी मोर चंद्रिका का विशिष्ट श्रृंगार धराया जाता है. सामान्यतया श्

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Jan 12 min read


व्रज – पौष शुक्ल द्वादशी (एकादशी क्षय)
व्रज – पौष शुक्ल द्वादशी (एकादशी क्षय) Wednesday, 31 December 2025 रसिकनी रसमे रहत गढी । कनकवेली व्रुषभानुं नंदिनी श्याम तमाल चढी ।।१।। बिहरत श्री गिरिधरनलाल संग कोने पाठ पढी । कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर रति-रस केलि बढी ।।२।। पुत्रदा एकादशी, श्रीजी में रस मंडान त्रिकुटी के बागा को श्रृंगार विशेष - आज पुत्रदा एकादशी है. आज श्रीजी में शाकघर का रस-मंडान होता है. रस-मंडान के दिन श्रीजी को संध्या-आरती में शाकघर में सिद्ध 108 स्वर्ण व रजत के पात्रों में गन्ने का रस अरोगाया जाता है. इ

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Dec 31, 20252 min read


व्रज – पौष शुक्ल दशमी
व्रज – पौष शुक्ल दशमी Tuesday, 30 December 2025 बादामी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर सोना की गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : टोडी) आये अलसाने लाल जोयें हम सरसाने अनत जगे हो भोर रंग राग के l रीझे काहू त्रियासो रीझको सवाद जान्यो रसके रखैया भवर काहू बाग़ के ll 1 ll तिहारो हु दोस नाहि दोष वा त्रिया को जाके रससो रस पागे जाग के l ‘तानसेन’ के प्रभु तुम बहु नायक आते जिन बनाय सांवरो पेच पाग के ll 2 ll साज – श्रीजी में आज बादामी रंग की सुरमा सित

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Dec 30, 20251 min read


व्रज – पौष शुक्ल नवमी
व्रज – पौष शुक्ल नवमी Monday, 29 December 2025 बैंगनी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : तोडी) हों बलि बलि जाऊं तिहारी हौ ललना आज कैसे हो पाँव धारे l कौन मिस आवन बन्यो पिय जागे भाग्य हमारे ll 1 ll अब हों कहा न्योछावर करूँ पिय मेरे सुंदर नंददुलारे l 'नंददास' प्रभु तन-मन-धन प्राण यह लेई तुम पर वारे ll 2 ll साज – आज श्रीजी में बैंगनी रंग की हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी

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Dec 29, 20251 min read


व्रज – पौष शुक्ल अष्टमी
व्रज – पौष शुक्ल अष्टमी Sunday, 28 December 2025 तै जु नीलपट दियौरी । सुनहु राधिका श्यामसुंदरसो बिनहि काज अति रोष कियौरी ।।१।। जलसुत बिंब मनहु जब राजत मनहु शरद ससि राहु लियो री । भूमि घिसन किधौं कनकखंभ चढि मिलि रसही रस अमृत पियौंरी ।।२।। तुम अति चतुर सुजान राधिका कित राख्यौ भरि मान हियौरी । सूरदास प्रभु अंगअंग नागरि, मनहुं काम कियौ रूप बिचौरी ।।३।। फिरोज़ी घटा (सप्तम) आज श्रीजी में फिरोज़ी घटा के दर्शन होंगे. इसका क्रम ऐच्छिक है और खाली दिन होने के कारण आज धरायी जाएगी. आज श्री

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Dec 28, 20252 min read


व्रज – पौष शुक्ल सप्तमी
व्रज – पौष शुक्ल सप्तमी Saturday, 27 December 2025 जुगल वर आवत है गठजोरें । संग शोभित वृषभान नंदिनी ललितादिक तृण तोरे ।।१।। शीश सेहरो बन्यो लालकें, निरख हरख चितचोरे । निरख निरख बलजाय गदाधर छबि न बढी कछु थोरे ।।२।। शीतकाल के सेहरा का द्वितीय शृंगार शीतकाल में श्रीजी को चार बार सेहरा धराया जाता है. इनको धराये जाने का दिन निश्चित नहीं है परन्तु शीतकाल में जब भी सेहरा धराया जाता है तो प्रभु को मीठी द्वादशी आरोगाई जाती हैं. आज प्रभु को खांड़ के रस की मीठी लापसी (द्वादशी) आरोगाई जा

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Dec 27, 20252 min read


व्रज – पौष शुक्ल षष्ठी
व्रज – पौष शुक्ल षष्ठी Friday, 26 December 2025 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री दामोदरलालजी महाराज का उत्सव(विस्तुत विवरण अन्य पोस्ट में) श्रीजी को नियम के पीले रंग के साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर हीरे की टिपारा की टोपी के ऊपर टिपारा का साज धराया जाता है. श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनमनोहर (केशर बूंदी) के लड्डू, दूधघर में सिद्ध की गयी केसरयुक्त बासोंदी की हांडी और चार विविध प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (कि

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Dec 26, 20252 min read


व्रज – पौष शुक्ल पंचमी
व्रज – पौष शुक्ल पंचमी Thursday, 25 December 2025 केसरी साटन के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा एव तुर्री के श्रृंगार आज द्वितीय पीठाधीश्वर श्री विट्ठलनाथजी के मंदिर में नित्यलीलास्थ गौस्वामी श्री गोपेश्वरलालजी का उत्सव है अतः प्राचीन परंपरानुसार आज श्रीजी प्रभु को धराये जाने वाले वस्त्र भी द्वितीय पीठाधीश्वर प्रभु श्री विट्ठलनाथजी के घर से सिद्ध हो कर आते हैं. वस्त्रों के संग बूंदी के लड्डुओं की एक छाब भी श्रीजी व श्री नवनीतप्रियाजी के भोग हेतु आती

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Dec 25, 20252 min read


व्रज – पौष कृष्ण तृतीया
व्रज – पौष कृष्ण तृतीया Wednesday, 24 December 2025 बैंगनी साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर हीरा के जड़ाऊ ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आसावरी) आज शृंगार निरख श्यामा को नीको बन्यो श्याम मन भावत । यह छबि तनहि लखायो चाहत कर गहि के मुखचंद्र दिखावत ।।१।। मुख जोरें प्रतिबिम्ब विराजत निरख निरख मन में मुस्कावत । चतुर्भुज प्रभु गिरिधर श्री राधा अरस परस दोऊ रीझि रिझावत ।।२।। साज – श्रीजी को आज बैंगनी साटन पर सुरमा

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Dec 24, 20251 min read


व्रज – पौष शुक्ल तृतीया
व्रज – पौष शुक्ल तृतीया Tuesday, 23 December 2025 दोहरा वस्त्र के शृंगार ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को मेघस्याम रंग के दरियाई का सूथन एवं मेघस्याम रंग के दरियाई पर केसरी रंग का हांसिया का तीन कोनो वाला चोली एवं चाकदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर फेटा का साज का श्रृंगार धराया जायेगा. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : आशावरी) व्रज के खरिक वन आछे बड्डे बगर l नवतरुनि नवरुलित मंडित अगनित सुरभी हूँक डगर ll 1 ll जहा तहां दधिमंथन घरमके प्रमुदित माखनच

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Dec 23, 20252 min read


व्रज – पौष शुक्ल द्वितीया
व्रज – पौष शुक्ल द्वितीया Monday, 22 December 2025 लाल साटन के घेरदार वागा, केसरी पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : तोडी) हों बलि बलि जाऊं तिहारी हौ ललना आज कैसे हो पाँव धारे l कौन मिस आवन बन्यो पिय जागे भाग्य हमारे ll 1 ll अब हों कहा न्योछावर करूँ पिय मेरे सुंदर नंददुलारे l 'नंददास' प्रभु तन-मन-धन प्राण यह लेई तुम पर वारे ll 2 ll साज – श्रीजी में आज लाल रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया वाली शी

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Dec 22, 20251 min read


व्रज – पौष शुक्ल प्रतिपदा(द्वितीय)
व्रज – पौष शुक्ल प्रतिपदा(द्वितीय) Sunday, 21 December 2025 छप्पनभोग मनोरथ (बड़ा मनोरथ) आज श्रीजी में श्रीजी में किन्हीं वैष्णव द्वारा आयोजित छप्पनभोग का मनोरथ होगा. नियम (घर) का छप्पनभोग वर्ष में केवल एक बार मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को ही होता है. इसके अतिरिक्त विभिन्न खाली दिनों में वैष्णवों के अनुरोध पर श्री तिलकायत की आज्ञानुसार मनोरथी द्वारा छप्पनभोग मनोरथ आयोजित होते हैं. इस प्रकार के मनोरथ सभी वैष्णव मंदिरों एवं हवेलियों में होते हैं जिन्हें सामान्यतया ‘बड़ा मनोरथ’ कहा

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Dec 21, 20252 min read
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