top of page
Search

व्रज - चैत्र कृष्ण नवमी

व्रज - चैत्र कृष्ण नवमी

Thursday, 12 March 2026


हरे ख़िनख़ाब के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा के श्रृंगार


राजभोग दर्शन –


कीर्तन – (राग : आसावरी)


जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो ।

लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।।

ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो ।

ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।।

जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो ।

तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।।


साज – श्रीजी में आज हरे रंग की ज़री की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.


वस्त्र – श्रीजी को आज हरे रंग की साटन (Satin) का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली, चाकदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के धराये जाते हैं.


श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर हरे रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, नागफणी (जमाव) का कतरा तुर्री एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में २ जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.

श्रीकंठ में कमल माला एवं श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में लाल मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं.

पट फ़िरोज़ी व गोटी मीना की आती है.



संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर छेड़ान के (छोटे) श्रृंगार धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराये जाते हैं.

 
 
 

Comments


© 2020 by Pushti Saaj Shringar.

bottom of page